रचना क्र. 4
श्री जे. कृष्णमूर्ती
श्री पेठेकाका
नमो कृष्णमूर्तिं, परम ज्ञानमूर्तिम् |
भ्रमितान्ध जीवस्य खलु दीपस्तंभम् |
प्रकाशितो मुक्तिमार्गश्च येन |
प्रज्ञां च दैवीं प्रतिभां नमामि ||
रचना क्र. 4
श्री पेठेकाका
नमो कृष्णमूर्तिं, परम ज्ञानमूर्तिम् |
भ्रमितान्ध जीवस्य खलु दीपस्तंभम् |
प्रकाशितो मुक्तिमार्गश्च येन |
प्रज्ञां च दैवीं प्रतिभां नमामि ||