रचना क्र. 104
कृष्ण करो यजमान
श्री मीराबाई
कृष्ण करो यजमान ।
प्रभु तुम कृष्ण करो यजमान ॥धृ॥
जाकी कीरत बेद बखानत ।
सांखी देत पुरान ॥१॥
मोर मुगुट पीतांबर शोभत ।
कुंडल झलकत कान ॥२॥
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर ।
दे दरशन का दान ॥३॥
© 2026 साधननंदादीप — डॉ. सुहास पेठे. सर्व हक्क राखीव.
रचना क्र. 104
श्री मीराबाई
कृष्ण करो यजमान ।
प्रभु तुम कृष्ण करो यजमान ॥धृ॥
जाकी कीरत बेद बखानत ।
सांखी देत पुरान ॥१॥
मोर मुगुट पीतांबर शोभत ।
कुंडल झलकत कान ॥२॥
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर ।
दे दरशन का दान ॥३॥