रचना क्र. 208
भज मन सांब सदाशिव पाय
श्री रामकृष्णानंद महाराज
भज मन सांब सदाशिव पाय ॥धृ॥
त्रिगुणभवाब्धि शोषक याहुन
नसे नसे सदुपाय ॥१॥
धावत पावत संकटि विषमी
वत्सल ते जणु माय ॥२॥
हृत्कमली सुरनरअसुरेधित
क्षणभरि तरि तू ध्याय ॥३॥
गौरीलालित विधिहरिवंदित
शिव शिव वदनी गाय ॥४॥
गोविंदात्मज राम, अविद्या
शिवपद नमिता जाय ॥५॥
