रचना क्र. 235
दीनदयाल दया करो राम
श्री रामदास स्वामी
दीनदयाल दया करो राम ॥धृ॥
येहि संसार, अपार को जिये,
उदास भया ॥१॥ दया करो..
जानत जानत, मानत मन को,
ऐसा काम कीया ॥२॥ दया करो..
दास दीन जन, शरणागत (है ) ,
मारो कहत, सब गया ॥३॥
© 2026 साधननंदादीप — डॉ. सुहास पेठे. सर्व हक्क राखीव.
रचना क्र. 235
श्री रामदास स्वामी
दीनदयाल दया करो राम ॥धृ॥
येहि संसार, अपार को जिये,
उदास भया ॥१॥ दया करो..
जानत जानत, मानत मन को,
ऐसा काम कीया ॥२॥ दया करो..
दास दीन जन, शरणागत (है ) ,
मारो कहत, सब गया ॥३॥