रचना क्र. 43
मान ले कहना हमारा
श्री ब्रह्मानंद (पुष्कर) · null
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मान ले कहना हमारा
मन की लालच छोड दे ॥धृ॥
चार दिन की जिंदगी
आखिर यहाँ से जायगा ।
सब तरफ से दिल हटा
हरि के चरण में जोड दे ॥१॥
यह सभी स्वारथ भरे
जिनको पियारे जानता ।
भजन कर प्रभु का सदा
सबसे परीती तोड दे ॥२॥
बालकपना जोबन गया
बूढा हुवा मरने लगा ।
अब तो मूरख चेतकर
विषयों से मन को मोड दे ॥३॥
यह तेरा मानुष जनम
पलपल में बीता जा रहा ।
‘ब्रह्मानंद’मिले नहीं फिर
जो तू लाख करोड दे ॥४॥
