रचना क्र. 124
तुम बिन मेरी कौन खबर ले
श्री मीराबाई
तुम बिन मेरी कौन खबर ले ।
गोवर्धन गिरिधारी ॥धृ॥
मोर मुकुट पीतांबर शोभे ।
कुंडल की छबी न्यारी ॥१॥
भरी सभा में द्रौपदी ठारी ।
राखो लाज हमारी ॥२॥
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर ।
चरण कमल बलिहारि ॥३॥
© 2026 साधननंदादीप — डॉ. सुहास पेठे. सर्व हक्क राखीव.
रचना क्र. 124
श्री मीराबाई
तुम बिन मेरी कौन खबर ले ।
गोवर्धन गिरिधारी ॥धृ॥
मोर मुकुट पीतांबर शोभे ।
कुंडल की छबी न्यारी ॥१॥
भरी सभा में द्रौपदी ठारी ।
राखो लाज हमारी ॥२॥
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर ।
चरण कमल बलिहारि ॥३॥