रचना क्र. 522
ढेर दे गया खुदा
श्री पेठेकाका · null
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ढेर दे गया खुदा,हमीं ने खो दिया |
शर्मिंदा दीन तेरी,शरण आ गया || धृ ||
देह की मे बाँसुरी,वाणि मधुरता भारी |
सुस्वर ना,सत्यवचन,विफल हो गया ||१ ||
श्रवण नयन अतुल दान,ना दर्शन,ना कीर्तन |
इधर उधर करत यूँहि,सब गँवा दिया ||२ ||
हाथ, पैर मन देकर,अमित सृष्टि को पाकर |
स्वार्थ में लगा के दीन,जनम खोऽऽऽदिया ||३ ||
